एएमआर पर प्रहार: एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान


4 of 3,828
रेवाड़ी, 17 फरवरी (सोनिया सैनी)
एंटीबायोटिक्स दवाओं के अनुचित एवं अत्यधिक उपयोग से बढ़ते एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (एएमआर) के गंभीर खतरे को देखते हुए चल रहे राष्ट्रीय जनजागरूकता अभियान “एएमआर पर प्रहार” के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर के.एल.पी कॉलेज की यूथ रेड क्रॉस (YRC), राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई, एनसीसी (NCC) तथा इको क्लब द्वारा एंटीबायोटिक्स के अनियंत्रित एवं चिकित्सकीय परामर्श के बिना उपयोग करने के विरुद्ध जागरूकता दिलाने हेतु एक शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कॉलेज के विद्यार्थियों एवं स्टाफ सदस्यों ने सामूहिक रूप से शपथ ग्रहण करते हुए यह संकल्प लिया कि वे बिना डॉक्टर के पर्चे के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन नहीं करेंगे, चिकित्सकों पर एंटीबायोटिक लिखने के लिए दबाव नहीं डालेंगे तथा डॉक्टर द्वारा निर्धारित पूरी खुराक का पालन करेंगे। शपथ कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस (एएमआर) के बढ़ते खतरे, इसके कारणों तथा इससे बचाव के उपायों की जानकारी भी दी गई। साथ ही बची हुई अथवा एक्सपायर्ड एंटीबायोटिक दवाओं के सुरक्षित निस्तारण तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने के महत्व पर भी बल दिया गया।
महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. कविता गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे जागरूकता अभियानों के माध्यम से विद्यार्थी समुदाय में स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदार व्यवहार विकसित होगा और समाज में एंटीबायोटिक्स के दुरुपयोग को रोकने में सहायता मिलेगी। यूथ रेड क्रॉस के काउंसलर डॉ राकेश सिंघल ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि एंटीबायोटिक्स का जिम्मेदार उपयोग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य बल्कि समाज के समग्र स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से प्रधान श्री रिपुदमन गुप्ता, उप प्रधान श्री संदीप खंडेलवाल, महासचिव श्री अरविंद गुप्ता एवं कोषाध्यक्ष श्रीमती उषा रुस्तगी ने इस अवसर पर कहा कि युवा वर्ग समाज में सकारात्मक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम है।
इस अवसर पर डॉ. प्रदीप अहलावत,डॉ. दिनेश शर्मा, डॉ. मंजू गर्ग, डॉ. विवेक कुमार, श्रीमती शिक्षा, श्री महेंद्र संभारिया, डॉ. रामबीर जाखड़, डॉ. ऋचा शर्मा, डॉ. ए. निवेदिता एवं श्रीमती अंकिता विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने एएमआर को “मौन महामारी” के रूप में पहचानते हुए इसके प्रसार को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया तथा भविष्य की पीढ़ियों के लिए एंटीबायोटिक दवाओं की प्रभावशीलता को सुरक्षित रखने हेतु जनजागरूकता फैलाने का निर्णय लिया।
