
मुकेश कुमार ने बताया कि उसने अपने तीनों बच्चों की पूरी फीस भी जमा करते आ रहे थे, वर्ष 2023 में वादी अनामिका ने प्रतिवादी स्कूल से कक्षा दसवीं में शिक्षा ग्रहण कर रही थी ओर वादी नम्बर 2 सुहाना ने कक्षा चौथी ओर वादी नम्बर 3 हनीश ने कक्षा दूसरी में शिक्षा ग्रहण करते आ थे थे, बच्चों के अभिभावक ने वर्ष 2024 में स्कूल को बता दिया था कि अगले सेशन में वह अपने बच्चों को किसी अन्य स्कूल में शिक्षा दिलवाएगा,
वर्ष 2024 में अनामिका ने दसवीं कक्षा का ऑनलाइन रिजल्ट लेकर किसी अन्य स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं ओर सुहाना और हनीश ने भी अस्थाई दाखिला लेकर राजकीय स्कूल संगवाडी में शिक्षा ग्रहण करना शुरू कर दिया, तीनों बच्चों का दूसरे स्कूल में स्थाई दाखिला नहीं हो पाया क्योंकि बाल विकास विद्यालय ने बच्चों के स्कूल छोड़ने के प्रमाण पत्र और अनामिका की दसवीं कक्षा की बोर्ड अंकतालिका देने से मना कर दिया, जिस कारण तीनों बच्चों का स्थाई दाखिला नहीं हो पा रहा था, तो बच्चों के अभिभावक ने कई बार बाल विकास विद्यालय से बच्चों के दस्तावेज की मांग की परंतु स्कूल ने अमान्य मदो में फीस की मांग करते हुए बच्चों के दस्तावेज देने से मना कर दिया, जिसके बाद बच्चों के अभिभावक ने कई बार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के भी चक्कर लगाए परंतु शिक्षा विभाग ने बच्चों की समस्या का समाधान नहीं करवाया, आखिर बच्चों के अभिभावक ने सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश चंद एडवोकेट से संपर्क किया जिसके बाद अधिवक्ता ने बच्चों की समस्या से संबंधित मामले को लेकर दिनांक 21-07-2025 को जिला रेवाड़ी के न्यायालय में बाल विकास विद्यालय और राजकीय स्कूल संगवाडी के खिलाफ वाद दायर कर दिया, न्यायालय ने दोनों पक्षों की बात को सुना जिस पर स्कूल ने कहा कि बच्चों की फीस के 340274/- रूपये बकाया है, जिस पर कैलाश चंद अधिवक्ता ने भी बच्चों की ओर से बात को रखा जिसके बाद स्कूल ने दिनांक 22 अगस्त 2025 को सुहाना की SLC जारी कर दी, ओर राजकीय स्कूल ने बिना SLC के बच्चों के एग्जाम पर रोक लगा दी थी, अब दिनांक 18 फरवरी 2026 को हनीश की भी SLC जारी कर दी, बच्चों के अभिभावक ने अधिवक्ता कैलाश चंद ओर जिला न्यायालय का आभार प्रकट किया, और कहा कि कैलाश चंद एडवोकेट ने हमारे बच्चों के केस की निशुल्क पैरवी की है जिसके लिए हम उनका दिल से धन्यवाद प्रकट करते है,
