रेवाड़ी 17 मार्च सोनिया सैनी,
बांझपन (Infertility) की समस्या से जूझ रहे दंपत्तियों के लिए चिकित्सा जगत की नई तकनीकों और समाधानों पर चर्चा करने हेतु आगामी 21 और 22 मार्च को एक विशेष कार्यशाला और कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर और पूरे हरियाणा से सैकड़ों अनुभवी चिकित्सक और विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे।
इस महत्वपूर्ण आयोजन की जानकारी देते हुए ललिता मेमोरियल हॉस्पिटल की डायरेक्टर और कार्यक्रम की को-ऑर्डिनेटर डॉ. सीमा मित्तल ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य चिकित्सा जगत में हो रहे नए बदलावों को साझा करना है। उन्होंने बताया कि इस दौरान ‘हैंड्स-ऑन’ वर्कशॉप (Hands-on Workshop) का भी आयोजन होगा, जिससे डॉक्टरों को बांझपन के उपचार से जुड़ी बारीकियों को समझने में मदद मिलेगी।
इन मुख्य बिंदुओं पर होगी चर्चा:
* तकनीकी चुनौतियाँ: बांझपन के इलाज के दौरान आने वाली तकनीकी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
* टेस्ट ट्यूब बेबी (IVF) फेलियर: टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया के असफल होने के कारणों और उनके समाधानों पर विशेषज्ञ अपने अनुभव और शोध साझा करेंगे।
* अनुभव साझा करना: दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा के विभिन्न हिस्सों से आने वाले डॉक्टर्स जटिल केसों और उनके सफल उपचार पर मंथन करेंगे।
डॉ. सीमा मित्तल के अनुसार, यह कॉन्फ्रेंस न केवल डॉक्टरों के ज्ञानवर्धन के लिए है, बल्कि इसके माध्यम से बांझपन के रोगियों को भविष्य में और भी बेहतर और सटीक इलाज मिल सकेगा। आयोजन की तैयारियां जोरों पर हैं और इसमें कई प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों जैसे अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली आर्मी हॉस्पिटल (आर एंड आर), दिल्ली लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पंडित भगवत दयाल शर्मा आयुर्विज्ञान संस्थान, रोहतक एवं विभिन्न निजी संस्थान के विशेषज्ञों के शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है।
Dr. Ghanshyam Mittal
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