
रेवाड़ी,04 फरवरी,(अमित यादव)lभारत-अमेरिका के बीच सस्ता टैरिफ समझौता: हरियाणा के किसान से लेकर कारोबार तक क्या बदलेगा? भारत और अमेरिका के बीच जो रियायती टैरिफ व्यापार समझौता होने की चर्चा चल रही है, उसका असर सिर्फ बड़े शहरों या कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सीधा फायदा हरियाणा के किसान, छोटे कारोबारी, फैक्ट्री मजदूर और आम जनता तक पहुंच सकता है।सरल शब्दों में कहें तो इस समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के सामान पर टैक्स (टैरिफ) कम करेंगे, जिससे सामान सस्ता पड़ेगा और खरीद-फरोख्त बढ़ेगी। किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा,हरियाणा में दूध, अनाज, सब्ज़ी, कपास और प्रोसेस्ड फूड का बड़ा उत्पादन होता है। टैरिफ कम होने से ये सामान अमेरिका जैसे बड़े बाजार में आसानी से बिक सकेगा। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. बिबेक देबरॉय के अनुसार, “जब निर्यात बढ़ता है तो उसका सीधा असर गांव की आमदनी पर पड़ता है। किसान और छोटे उत्पादक मजबूत होते हैं।”निर्यात बढ़ने से किसान को बेहतर दाम मिलने की संभावना बनेगी और बिचौलियों पर निर्भरता भी घटेगी।रोज़गार और व्यापार में बढ़ोतरी
अमेरिका भारत का बड़ा व्यापारिक साथी है। अगर टैक्स कम हुआ तो:
• फैक्ट्रियों में काम बढ़ेगा
• युवाओं को नौकरी के मौके मिलेंगे
• छोटे उद्योग (MSME) को नया बाजार मिलेगा,आर्थिक विशेषज्ञ डॉ. मदन सबनवीस कहते हैं,“भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रोजगार पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है, खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में।”
महंगाई पर लगेगी लगाम
आज आम आदमी की सबसे बड़ी परेशानी महंगाई है। टैरिफ कम होने से मशीन, कच्चा माल और टेक्नोलॉजी सस्ती होगी। इससे सामान बनाने की लागत घटेगी और बाजार में चीजें सस्ती आ सकती हैं। नीति विशेषज्ञ प्रो. अश्विनी महाजन के अनुसार,“अगर उत्पादन लागत घटती है तो महंगाई पर अपने-आप दबाव आता है, जिससे आम आदमी को राहत मिलती है।”दुनिया में भारत की साख मजबूत,यह समझौता सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। इससे भारत और अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी। चीन पर निर्भरता कम करने के लिए दुनिया भारत को एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में देख रही है।विदेश नीति विशेषज्ञ हर्ष वी. पंत कहते हैं,“भारत-अमेरिका आर्थिक सहयोग आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रभावित करेगा।
”चुनौती भी समझनी जरूरी
हालांकि सस्ते अमेरिकी सामान से देश के कुछ छोटे उद्योगों को नुकसान हो सकता है। इसलिए सरकार को ध्यान रखना होगा कि देशी किसान, कारीगर और उद्योग सुरक्षित रहें और ‘मेक इन इंडिया’ को नुकसान न हो।
