
11 अप्रैल, 2026, रेवाड़ी
दिल्ली रोड स्थित के.एल.पी कॉलेज, रेवाड़ी के आईक्यूएसी (IQAC) एवं रिसर्च सेल और मनिपाल यूनिवर्सिटी कॉलेज, मलेशिया के सहयोग से “विकसित भारत @2047: विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वाणिज्य एवं मानविकी के माध्यम से बहु-विषयक मार्ग’ विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में देश-विदेश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं एवं विद्वानों ने सहभागिता कर अपने शोध-पत्र एवं अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 11:00 बजे अतिथियों एवं प्रतिभागियों के स्वागत के साथ हुआ, जिसका संचालन डॉ. ऋचा शर्मा, संयुक्त आयोजन सचिव द्वारा किया गया। इसके उपरांत माँ सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। इंडियन इंस्टीट्यू ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी, भोपाल के निदेशक प्रो.आशुतोष कुमार सिंह सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में ऑनलाइन उपस्थित रहें। IGNOU, नई दिल्ली के अंग्रेजी विभाग की प्रो. विभूति गौड़ कार्यक्रम में कीनोट वक्ता के रूप में उपस्थित रहीं, एवं सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हिमाचल प्रदेश के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के प्रो. प्रदीप कुमार कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे।
सर्वप्रथम कॉलेज गवर्निंग बॉडी के अध्यक्ष श्री रिपु दमन गुप्ता, उपाध्यक्ष श्री संदीप खंडेलवाल, महासचिव श्री अरविंद गुप्ता, कोषाध्यक्ष श्रीमती उषा रुस्तगी, एवं प्राचार्या प्रो. कविता गुप्ता को भगवद गीता प्रस्तुत कर उनका अभिनंदन किया गया। तत्पश्चात प्राचार्या महोदया ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह सम्मेलन केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आज के दौर में शिक्षा का उद्देश्य केवल किसी एक विषय में डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों की समझ विकसित करना है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब हमारे विद्यार्थी वैज्ञानिक सोच, तकनीकी दक्षता, व्यावसायिक समझ और मानवीय मूल्यों के साथ आगे बढ़ेंगे।
मुख्य अतिथि प्रो. अशुतोष कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “विकसित भारत@2047” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बहु-विषयक शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आज के समय में केवल एक विषय का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वाणिज्य एवं मानविकी के समन्वय से ही वास्तविक विकास संभव है। उन्होंने आगे कहा कि— “जब एक इंजीनियर को सामाजिक समस्याओं की समझ होगी, एक कॉमर्स विद्यार्थी को तकनीकी ज्ञान होगा और एक मानविकी का छात्र डिजिटल कौशल से जुड़ा होगा, तभी हम एक समग्र और सशक्त भारत का निर्माण कर पाएंगे।” उन्होंने यह भी ज़ोर दिया कि बहु-विषयक शिक्षा नवाचार, स्टार्टअप संस्कृति और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देती है, जो भारत को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए सभी माननीय अतिथियों एवं विशिष्ट गणमान्य व्यक्तियों द्वारा शोध-पत्र प्रस्तुतियों की ई-सारांश पुस्तक का औपचारिक विमोचन किया गया। इसके उपरांत डॉ. अनुराधा दीपक, सम्मेलन संयोजक ने सम्मेलन की अवधारणा पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इस सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न विषयों के बीच समन्वय स्थापित कर ज्ञान के नए आयामों को विकसित करना है। उन्होंने बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को देश-विदेश के शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों से अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया प्राप्त हुई है। कुल 443 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जबकि 348 शोध-पत्र प्रस्तुतियाँ विभिन्न देशों से प्राप्त हुई हैं, जो इस आयोजन की व्यापकता और महत्व को दर्शाती हैं।
इसके बाद डॉ. विभूति गौड़ ने अपने कीनोट वक्तव्य में समकालीन शिक्षा, अनुसंधान एवं वैश्विक परिप्रेक्ष्य में बहु-विषयक अध्ययन की भूमिका पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। प्लेनरी सत्र में मुख्य वक्ता प्रोफेसर प्रदीप कुमार ने विज्ञान एवं मानविकी के समन्वय पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंत में आयोजन सचिव श्री राकेश सिंघल ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इसके पश्चात दोपहर 1:20 बजे से विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया सम्मेलन में कुल 9 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए। इन सत्रों में देश-विदेश के विद्वानों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। प्रत्येक सत्र में अध्यक्ष एवं सह-अध्यक्ष द्वारा प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया गया तथा शोध-पत्रों पर उपयोगी सुझाव दिए गए। तकनीकी सत्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वाणिज्य एवं मानविकी के विविध क्षेत्रों से संबंधित शोध प्रस्तुत किए गए, जिससे प्रतिभागियों को नवीन ज्ञान एवं दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। सभी सत्रों का संचालन सुचारु रूप से ऑनलाइन माध्यम से ज़ूम प्लेटफॉर्म पर किया गया।
कॉलेज प्रबंधन समिति ने इस सफल आयोजन पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होते हैं। इससे उन्हें सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त होता है। प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन निरंतर किए जाते रहेंगे, जिससे विद्यार्थियों में शोध एवं नवाचार की भावना को प्रोत्साहन मिले।
सम्मेलन का प्रथम दिवस अत्यंत रोचक, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक रहा, जिसमें विभिन्न सत्रों के माध्यम से विद्वानों एवं शोधार्थियों ने अपने विचारों और शोध कार्यों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। पूरे दिन का वातावरण उत्साह, जिज्ञासा और शैक्षणिक आदान-प्रदान से परिपूर्ण रहा।
प्रथम दिवस की इस सफल एवं प्रभावशाली शुरुआत के साथ अब सभी प्रतिभागियों को द्वितीय दिवस की उत्सुकता से प्रतीक्षा है। आशा की जा रही है कि सम्मेलन का आगामी दिवस भी इसी ऊर्जा और उत्कृष्टता के साथ संपन्न होगा तथा यह आयोजन एक भव्य और सफल समापन की ओर अग्रसर होगा।
इस सम्मेलन में पी ई बी सदस्य तथा सतीश पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के मैनेजर श्री अजय यादव एवं पब्लिक एजुकेशन बोर्ड के सदस्य श्री गौरव यादव भी उपस्थित रहे। कॉलेज के आई क्यू ए सी, रिसर्च सेल तथा टीचिंग एवं नॉन टीचिंग संकाय सदस्यों ने सहभागिता कर इस सम्मेलन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
